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हिमाचल की आर्थिक स्थिति पर आगामी विधानसभा सत्र में श्वेत-पत्र लाएगी सुक्खू सरकार

  • हिमाचल की आर्थिक स्थिति पर आगामी विधानसभा सत्र में श्वेत-पत्र लाएगी सुक्खू सरकार

आपकी खबर, शिमला।

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार और संगठन के बीच समन्वय को और मजबूत करने के दृष्टिगत प्रति माह कांग्रेस मुख्यालय, राजीव भवन, शिमला में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और मंत्रियों के मध्य आपसी चर्चा के लिए बैठकें आयोजित की जाएंगी। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं की विभिन्न समस्याओं के अविलंब एवं प्रभावी समाधान में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह से परामर्श के बाद यह कदम उठाया गया है।

मुख्यमंत्री ने आज स्वयं राजीव भवन पहुंच कर इस बारे में पहल की और लगभग तीन घंटे तक वे पार्टी कार्यालय में उपस्थित रहे। इस दौरान उन्होंने प्रदेश के विभिन्न भागों से आए प्रतिनिधिमंडलों, पार्टी कार्यकर्ताओं तथा आम लोगों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनीं एवं अधिकांश का मौके पर निपटारा भी किया।

इस अवसर पर मीडिया प्रतिनिधियों से अनौपचारिक बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने दोहराया कि प्रदेश सरकार विधानसभा के आम चुनावों में कांग्रेस पार्टी द्वारा प्रदत्त सभी दस गारंटियों को पूर्ण करने के लिए दृढ़ संकल्प है। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल की पहली बैठक में ही प्रदेश में ओपीएस लागू कर दी गई है जिससे एक लाख 36 हजार से अधिक सरकारी कर्मचारियों को लाभ मिला है। उन्होंने कहा कि अन्य सभी गारंटियां भी चरणबद्ध ढंग से पूरी की जाएंगी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के दृष्टिगत राज्य के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में राजीव गांधी डे बोर्डिंग स्कूल खोले जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण से आगे बढ़ रही है ताकि लोगों की आकांक्षाओं को पूर्ण किया जा सके। प्रदेश की चिंताजनक आर्थिक सेहत पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार आगामी विधानसभा सत्र में राज्य की आर्थिक स्थिति पर श्वेत-पत्र लाएगी ताकि लोगों को इस बारे में वास्तविक स्थिति से अवगत करवाया जा सके। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष को सलाह देते हुए कहा कि कोई भी आरोप लगाने से पहले वे पूर्व भाजपा सरकार के पांच वर्षों के कार्यकाल का आत्म-विश्लेषण अवश्य कर लें।

ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार को 75 हजार करोड़ रुपये का ऋण और 11 हजार करोड़ रुपये सरकारी कर्मचारियों के एरियर की देनदारी विरासत में मिली है। इसके अतिरिक्त पूर्व सरकार ने अपने कार्यकाल के अंतिम छः माह में 900 से अधिक संस्थान खोले अथवा स्तरोन्नत किए, जिससे प्रदेश के राजस्व पर 5000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

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