हिमाचल

सुकेत सत्याग्रह की ऐतिहासिक नगरी पांगणा में गूंजे देश भक्ति के तराने

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“मेरी माटी मेरा देश” कार्यक्रम का खंड स्तरीय समारोह सरस्वती विद्या मंदिर पांगणा मे आयोजित किया गया। स्वतंत्रता सेनानियों की भूमि पांगणा सुकेत रियासत की आदि राजधानी रही है। 765 ईश्वी मे बंगाल से आए वीरसेन ने यहा सुकेत राज्य की नींव रखी।पांगणा का सम्बंध महाभारत काल की घटनाओ से रहा है।पांडव अपने अज्ञातवास काल में पांगणा में रुके।पांगणा में पांडवों की क्रीड़ा स्थली होने के कारण स्थान का नाम पूर्व में पांडवांगण पड़ा। जो कालांतर में पांगणा के नाम से सुविख्यात हुआ।पांगणा सन् 1948 फरवरी में रजवाड़ाशाही के विरुद्ध उठे सत्याग्रह आंदोलन का केंद्र रहा। पांगणा वीर सैनानियो की भूमि रही है। देश के नए संसद भवन के निर्माण के लिए पांगणा की वीरभूमि से भी मिट्टी ले जाई गई। 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध व 20 वी शताब्दी के आरंभ से ही सुकेत के कई स्वतंत्रता सेनानी अंग्रेजो के विरुद्ध संघर्ष की योजना को क्रियान्वित करते रहे।राजसी व ब्रिटिश शासन के विरोध मे आंदोलन करते रहे हैं।18 फरवरी 1948 मे सुकेत रियासत मे ही लोकप्रिय सरकार के गठन के लिए रियासती सत्ता के विरुद्ध सत्याग्रह का उद्घोष हुआ था। सुकेत में 1862,1876व 1924, ईस्वी में भीषण सत्याग्रह ने रजवाड़ाशाही की जड़ों को हिला कर रख दिया। बीसवीं शताब्दी में पांगणा के कई लोग आजाद हिंद फौज के सक्रिय सेनानी रहे और विदेशों में जाकर अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष की योजना को क्रियान्वित करते रहे। 18 फरवरी 1948 को सुकेत रियासत में लोकप्रिय सरकार के गठन के लिए सियासत के विरुद्ध सत्याग्रह का घोष हुआ था 19 फरवरी 1948 से 22 फरवरी 1948 तक लगभग 5000 सत्याग्रही सुकेत की राजधानी जाते हुए पांगणा मे 4 दिन तक रुके रहे।पांगणा के जागरूक लोगों ने सत्यग्रहियो का इतने दिनों तक हार्दिक अतिथि सत्कार किया। इस तरह सुकेत की आदि राजधानी पांगणा वैदिक काल से संस्कृति व इतिहास का केंद्र रहा। पांगणा के लोगों का राष्ट्र कल्याण के लिए अतुल्य व स्तुत्य योगदान रहा है। उत्तर क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र पटियाला के सौजन्य से संपन्न इस कार्यक्रम मे तीर्थ तुल्य पांगणा की मिट्टी को नमन ,वीरों का वंदन तथा देश के लिए बलिदान देने वाले वीरों को समर्पित अभियान के उपलक्ष्य में मण्डी जिला के चुनिंदा कलाकारों ने देश भक्ति के तरानो से छात्रों अध्यापक और अभिभावकों तथा युवाओं में जोश भर कर वीर सपूतों को नमन किया। कार्यक्रम का संयोजन व मंच संचालन करते हुए विख्यात संस्कृति कर्मी व एंकर कुलदीप गुलेरिया ने अमर शहीदों, स्वतंत्रता सेनानियों और वीर सपूतों की कुर्बानियों के समर्पण को याद कर पूरे वातावरण को देशभक्ति के रंग में रंग दिया। इस मौके कलाकारों द्वारा “ए मेरे वतन के लोगो” “कर चले हम फिदा जानो तन साथियों”, “जहां डाल डाल पर सोने की चिड़िया”, “मेरा रंग दे बसंती चोला” आदि देश भक्ति गीतों से पूरा परिसर गूंज उठा। कलाकार कर्मा,पंकज , रजनी, विनम्रता और दीक्षा के साथ ढोलक पर रवि कुमार, की बोर्ड पर सागर की उंगलियों का कमाल भी देखने को मिला।साउंड व्यवस्था राम सिंह की रही। इस अवसर पर गुलामी की मानसिकता को जड़ से निकाल फेंकने, देश की समृद्ध विरासत पर गर्व करने तथा देश की रक्षा करने वालों का सम्मान करना व भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने का सपना साकार करने के लिए शपथ भी ली गई। कार्यक्रम में सरस्वति विद्या मंदिर पांगणा की प्रधानाचार्या निम्मी शर्मा,नरेश,अध्यापक-अध्यापिकाओ,प्रबंधन व भवन निर्माण समिति, पांगणा पंचायत की वार्ड सदस्या पदमा गुप्ता, संस्कृति मर्मज्ञ डाॅक्टर जगदीशशर्मा, सेवानिवृत अधि क्षेत्र (वन) पदमनाभ,प्रगतिशील किसान हीरालाल महाजन,सुभाषपालेकर प्राकृतिक खेती की जिला सलाहकार लीना शर्मा,राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला की भाषा अध्यापिका दिनेश शर्मा’ पांगणा, राष्ट्रीय सेवा योजना,स्काउट एण्ड गाईड के स्वंय सेवी छात्र-छात्राओ, विद्या मंदिर के विद्यार्थियो, युवाओं, महिला मंडल, पंचायत प्रतिनिधियों, व्यापारियो,महामाया मंदिर समिति,पुलिस विभाग व अन्य विभागो के कर्मचारियो ने देश भक्ति के तराने गाकर अपनी भागीदारी सुनिश्चित की ।

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