नहीं रहे सुन्नी भज्जी की राजनीति के युग पुरुष भगत राम चौहान
लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे चौहान ने सोमवार को ली अंतिम सांस
आपकी खबर, सुन्नी। लंबे राजनीतिक सफर के बाद सोमवार को सुन्नी भज्जी की राजनीति के युग पुरुष भगत राम चौहान परलोक सिधार गए। शिमला ग्रामीण की राजनीति में इनका बहुत बड़ा कद माना जाता था। चौहान के निधन पर सीएम सुक्खू सहित पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर सहित तमाम बड़े नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है।
भगतराम चौहान का जन्म जून 1937 को तहसील सुन्नी की ग्राम पंचायत खटनोल के टड़ई गांव में हुआ। इन्होंने वरनैक्यूलर स्कूल खटनोल से प्राईमरी व दरबार सुन्नी से मिडल की परीक्षा उतीर्ण की। घर का कामकाज सही तरीके से चले, उसके लिए हिमाचल प्रैस और उसके बाद उद्योग विभाग में लिपिक के रूप में कार्य भी किया। साथ ही पढ़ाई भी जारी रखी। 1969 उन्होंने विधि महाविद्यालय देहरादून में प्रवेश लिया।
वर्ष 1971 में हिमाचल प्रदेश में भी कानून की पढ़ाई संभव हो गई तो 1972 में बीए एलएलबी की उपाधि प्राप्त की व नौकरी छोड़ कर वकालत शुरू कर दी।
यह दौर कुमारसैन सुन्नी विधान सभा क्षेत्र में लालचंद स्टोक्स का स्वर्णिम काल था और विद्या स्टोक्स राजनीति के दांवपेच सीख रही थी। साल 1974 में गंगा सिंह (मंडी) के संपर्क में आने के साथ ही जनसंघ में शामिल हुए और अपना राजनितिक सफर शुरू किया व ऊपरी हिमाचल में जनसंघ (बाद में भाजपा) का बीज रोपित किया। 1980 में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश चुनाव अधिकारी व कोषाध्यक्ष बने।1982 में संगठन के चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई उस समय दौलतराम व नगीन चंद्र पाल प्रदेश अध्यक्ष के प्रत्याशी के रूप में मैदान में थे, जिसमें नगीन चंद्रपाल अध्यक्ष बने थे।
1983 में उपाध्यक्ष प्रदेश चुनाव समिति के अध्यक्ष और 1998 में प्रदेश चुनाव अधिकारी भी रहे। इन्होंने 1982 में भाजपा प्रत्याशी के रूप में पहली बार विधान सभा सदस्य का चुनाव पंडित भास्करानंद (निर्दलीय) और बिहारी लाल खाची (कांग्रेस) से लड़ा, जिसमें पंडित भास्करानंद विजयी रहे। दूसरी बार 1985 में बिहारी लाल खाची (कांग्रेस) से सीधी टक्कर ली लेकिन सफलता न मिली। 1990 के चुनावों में पुनः खाची से सीधी टक्कर में विजय प्राप्त कर विधानसभा पहुंचे। विकास कार्यों में जन सहभागिता का उदाहरण पेश करते हुए खटनोल संपर्क मार्ग पर जनता के साथ स्वयं भी श्रमदान किया। संगठनात्मक दृष्टि से भाजपा में जो कद व पद इन्होंने प्राप्त किया निकट भविष्य में शिमला ग्रामीण शायद ही कोई कार्यकर्ता प्राप्त कर सके।

