हिमाचल बजट में मानदेयधारकों को बड़ी राहत, आंगनबाड़ी से लेकर आशा वर्कर और चौकीदारों तक बढ़ा मासिक मानदेय
सुक्खू सरकार ने विभिन्न श्रेणियों के मानदेय कर्मचारियों के भत्तों में की बढ़ोतरी, हजारों परिवारों को मिलेगा सीधा लाभ
आपकी खबर, शिमला।
21 मार्च। हिमाचल प्रदेश सरकार ने अपने बजट में विभिन्न श्रेणियों के मानदेय कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा प्रस्तुत बजट में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी सहायिकाओं, आशा वर्करों, सिलाई शिक्षकों, मिड-डे मील वर्करों, जल रक्षकों, वाटर कैरियर, पंचायत चौकीदारों, राजस्व चौकीदारों, SMC अध्यापकों, IT टीचर्स, SPOs तथा पार्ट टाइम मल्टी टास्क वर्कर्स सहित कई वर्गों के मासिक मानदेय में बढ़ोतरी की घोषणा की गई है।
सरकार के इस फैसले को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब महंगाई और बढ़ती घरेलू जरूरतों के बीच मानदेय पर काम करने वाले हजारों कर्मचारी लंबे समय से अपने भुगतान में बढ़ोतरी की मांग कर रहे थे। बजट में घोषित यह राहत सीधे तौर पर उन परिवारों को सहारा देगी जो सीमित मानदेय पर अपनी आजीविका चला रहे हैं।
बजट में सबसे प्रमुख घोषणाओं में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में 1000 रुपये मासिक बढ़ोतरी शामिल है। इसके बाद अब उन्हें 11,500 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलेगा। इसी तरह मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में भी 1000 रुपये बढ़ाए गए हैं, जिसके बाद अब उन्हें 8,300 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे।
इसके अलावा आंगनबाड़ी सहायिकाओं के मानदेय में भी 1000 रुपये मासिक बढ़ोतरी की गई है और अब उन्हें 6,800 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी कड़ी मानी जाने वाली आशा वर्करों को भी सरकार ने राहत देते हुए 1000 रुपये की बढ़ोतरी दी है, जिसके बाद उनका मासिक मानदेय 6,800 रुपये हो जाएगा।
इन घोषणाओं को महिला सशक्तिकरण और जमीनी स्तर पर काम कर रही कार्यकर्ताओं के सम्मान से जोड़कर भी देखा जा रहा है, क्योंकि आंगनबाड़ी और आशा वर्कर ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों में बच्चों, महिलाओं और स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाती हैं।
बजट में सिलाई शिक्षकों के मासिक मानदेय में 1000 रुपये की बढ़ोतरी का भी ऐलान किया गया है। हालांकि इस श्रेणी के लिए संशोधित कुल राशि इस पेज पर स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं है, लेकिन बढ़ोतरी की घोषणा साफ तौर पर की गई है।
वहीं मिड-डे मील वर्करों को 500 रुपये बढ़ोतरी के साथ अब 5,500 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। शिक्षा विभाग के वाटर कैरियर को 500 रुपये बढ़ाकर 6,000 रुपये प्रतिमाह देने की घोषणा की गई है। इसी तरह SMC अध्यापकों, IT Teachers और SPOs को भी 500-500 रुपये प्रतिमाह बढ़ोतरी देने का प्रावधान किया गया है।
इन घोषणाओं से उन वर्गों में राहत की उम्मीद जगी है जो वर्षों से कम मानदेय में सेवाएं दे रहे हैं और अपनी भूमिका के अनुपात में बेहतर भुगतान की मांग उठा रहे थे।
जल शक्ति विभाग और ग्रामीण ढांचे से जुड़े कई वर्गों को भी इस बजट में राहत मिली है। जल रक्षकों को 500 रुपये बढ़ोतरी के साथ अब 6,100 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। जल शक्ति विभाग के Multi Purpose Workers को भी 500 रुपये बढ़ाकर 6,000 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे।
इसी प्रकार लोक निर्माण विभाग के Multi Task Workers को 500 रुपये प्रतिमाह बढ़ोतरी देने की घोषणा की गई है। पैरा फिटर तथा पम्प ऑपरेटर को 500 रुपये बढ़ाकर 7,100 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलेगा।
ग्राम स्तर पर कार्यरत पंचायत चौकीदारों के मानदेय में भी 500 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद अब उन्हें 9,000 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। वहीं राजस्व चौकीदारों को 500 रुपये बढ़ाकर 6,800 रुपये प्रतिमाह देने का प्रावधान किया गया है। राजस्व लंबरदार को भी 500 रुपये बढ़ोतरी के साथ अब 5,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलेगा।
सरकार ने Part Time Multi Task Workers को भी 500 रुपये प्रतिमाह बढ़ोतरी देने की घोषणा की है। यह फैसला उन कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आया है जो सीमित भुगतान में लंबे समय से विभागीय कार्यों को संभाल रहे हैं। इसी तरह विभिन्न श्रेणियों के छोटे मानदेयधारकों को 500 से 1000 रुपये तक की बढ़ोतरी देकर सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि निचले स्तर पर काम करने वाले कर्मियों की मांगों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
यह बढ़ोतरी केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति पर भी सीधा असर डालेगी। पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में जहां जीवनयापन की लागत कई इलाकों में अधिक है, वहां 500 से 1000 रुपये मासिक की बढ़ोतरी भी कई परिवारों के लिए महत्वपूर्ण राहत साबित हो सकती है। खासकर महिलाओं, ग्रामीण कार्यकर्ताओं और निम्न मानदेय वर्गों के लिए यह निर्णय मनोबल बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
सुक्खू सरकार का यह कदम राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। बजट में एक ओर राजस्व जुटाने और वित्तीय संतुलन की बात की गई है, तो दूसरी ओर मानदेयधारकों को राहत देकर सरकार ने सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश भी की है। इससे सरकार यह संदेश देना चाहती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद जमीनी स्तर पर सेवाएं देने वाले वर्गों को प्राथमिकता दी जा रही है।
कुल मिलाकर हिमाचल प्रदेश बजट में मानदेयधारकों के लिए की गई यह घोषणा राहत भरी मानी जा रही है। आंगनबाड़ी, आशा, मिड-डे मील, पंचायत, जल शक्ति, शिक्षा और राजस्व विभागों से जुड़े कर्मचारियों के मानदेय में बढ़ोतरी से हजारों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। आने वाले समय में अब इन घोषणाओं के लागू होने और कर्मचारियों तक इसका वास्तविक लाभ पहुंचने पर सबकी नजर रहेगी।

