Sunday, April 14, 2024

सीटू ने केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ किया प्रदर्शन, 5 को दिल्ली जाएंगे हजारों किसान

  • सीटू ने केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ किया प्रदर्शन, 5 को दिल्ली जाएंगे हजारों किसान

आपकी खबर, शिमला। 

 

केंद्र सरकार की मजदूर, किसान व जनता विरोधी नीतियों के खिलाफ हिमाचल प्रदेश के जिला व ब्लॉक मुख्यालयों पर सीटू व हिमाचल किसान सभा के नेतृत्व में प्रदेशव्यापी प्रदर्शन किए। इन प्रदर्शनों में हज़ारों मजदूरों किसानों ने भाग लिया।

 

 

सीटू व किसान सभा ने एलान किया है कि आगामी 5 अप्रैल की दिल्ली रैली में प्रदेश से हजारों मजदूर किसान भाग लेंगे। सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, महासचिव प्रेम गौतम, किसान सभा अध्यक्ष डॉ कुलदीप तंवर व महासचिव होतम सौंखला ने कहा है कि केन्द्र की मोदी सरकार की नवउदारवादी व पूंजीपति परस्त नीतियों के चलते बेरोजगारी, गरीबी, असमानता व रोजी रोटी का संकट बढ़ रहा है। जनता की अपनी अवश्यकताओं की पूर्ति के लिए खर्च करने की क्षमता घट रही है। बेरोजगारी व महंगाई से गरीबी व भुखमरी बढ़ रही है।

 

भूख से जूझ रहे देशों की श्रेणी में भारत पिछड़ कर 121 देशों में 107 वें पायदान पर पहुंच गया है। इन आंकड़ों से मोदी सरकार की देश में तथाकथित विकास के ढिंढोरे की पोल खुल गई है।

 

केंद्रीय बजट 2023-24 में खाद्य सब्सीडी में भी 90,000 करोड़ रूपये की कटौती की गई है। एक ओर सरकार 81.35 करोड़ लोगों का मुफ्त राशन देने का ढिंढोरा पीट रही है तो दूसरी ओर खाद्य सुरक्षा कानून (FSA) के तहत मिलने वाले सस्ते राशन को बंद किया जा रहा है।

 

इससे जनता को बाजार से महंगा राशन लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। बढ़ती मंहगाई ने जनता की कमर तोड़ कर रख दी है। रसोई गैस, खाद्य वस्तुओं (आटा, दूध, तेल, दाल व चावल आदि) के दामों में भारी वृद्धि हो रही है। हाल ही में केन्द्र सरकार द्वारा पेश किए गए बजट में मंहगाई को कम करने के लिए कोई प्रावधान नहीं रखे गए हैं बल्कि उल्टा जनता को खाद्य वस्तुओं में मिल रहे अनुदान को कम किया जा रहा है जिससे मंहगाई में बढ़ोतरी होगी।

 

मजदूर किसान नेताओं ने कहा कि आज संघर्ष केवल आजीविका और काम करने की स्थिति की तत्काल मांगों के लिए नहीं है बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए है, हमारे समाज के धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक चरित्र को इस सांप्रदायिक और निरंकुश भाजपा-आरएसएस शासन से बचाने के लिए भी है।

 

उन्होंने देश भर के मजदूरों, किसानों और खेतिहर मजदूरों का आह्वान किया कि वे अपनी जायज मांगों के लिए एकजुट होकर संघर्ष करें और भाजपा-आरएसएस के नवउदारवादी, साम्प्रदायिक और निरंकुश शासन पर रोक लगाएं।

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