Friday, April 19, 2024

अंक गणना विचार, राहु मचा सकता है हाहाकार

देव गुरु बृहस्पति भी चलेंगे वक्री चाल

राजनीतिक उथल पुथल के भी बन रहे हैं आसार

आपकी खबर, कुमारसेन।
मानव जीवन पर नव ग्रहों के प्रभाव को लेकर सदियों से शोध होता चला आ रहा है। ज्योतिष शास्त्र शोध करने के बाद ही प्रमाणिक तौर पर सटीक भविष्य वाणी करता आया है। ज्योतिष शास्त्र में अंक गणित की भूमिका को किसी भी सूरत में नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। अंक गणना पर विचार करने के बाद जी गणना सामने आ रही है उसके अनुसार क्रूर ग्रहों में शुमार राहु आने वाले समय में हाहाकार मचा सकता है। राहु ग्रह के प्रभाव पर प्रदेश के जाने माने ज्योतिषाचार्य पंडित शशि पाल डोगरा बता रहे हैं कि देव गुरु बृहस्पति आज से अगले 118 दिनों के लिए वक्री चाल चलेंगे। लेकिन जब बात क्रूर ग्रह राहु की हो रही है तो अचानक ही देव गुरु बृहस्पति का जिक्र यहां क्यों किया जा रहा है। इस जिक्र की वजह का आपको बताने का प्रयास करते हैं कि आखिरकार राहु और बृहस्पति का क्या प्रभाव पड़ने वाला है। 4 सितंबर को रात्रि 07:40 बजे से देव गुरु बृहस्पति 118 दिनों के लिए यानी 31 दिसंबर की सुबह 08:12 बजे तक वक्री चाल चलने वाले हैं। ऐसे में बृहस्पति की वक्री चाल 4 सितम्बर यानी 4 अंक राहु से शुरु और 31 दिसंबर यानि 3+1=4 अंक पर ही पूर्ण होगी। अंक गणित के अनुसार 4 अंक राहु का है। राहु विचलित करने वाला ग्रह माना जाता है । वाणी का कारक, मानसिक शांति को खराब करने वाला व शमशान का कारक भी राहु को ही माना जाता है। सितम्बर महीने में गुरु ग्रह बृहस्पति वक्री चाल चलना शुरू करेगा। आपको बता दें कि बृहस्पति के वक्री होने का मतलब है बृहस्पति का उल्टा चलना। 12 महीनों का एक वर्ष होता है और सितम्बर वर्ष का नौवां महीना होता है। यानि सितम्बर का अंक 9 बनता है। अंक गणित में 9 मंगल ग्रह को दर्शाता है। मंगल अग्नि तत्व ग्रह है। जहां बैठता है वहां मानो आग लगा देता है। उसी अंक को अगर राहु का साथ मिल जाए तो परेशानियों में इजाफा कर देता है। राहु और मंगल यानी 4+9 का योग 13 होता है और
1+3 का योग भी 4 ही होता है। जो राहु का ही प्रतिनिधत्व करता है। कमोवेश बृहस्पति 31 दिसंबर तक वक्री है उस का भी 3+1 योग 4 अंक ही बनता है। जो किसी बड़े संकट के संकेत दे रहा है। शनि ग्रह भी 4 नवम्बर तक वक्री चल रहा है। पंडित डोगरा ने बताया कि इस प्रकार से दो विशेष ग्रहों बृहस्पति और शनि का वक्री होना किसी उथल पुथल का संकेत दे रहा है। पंडित डोगरा की यदि मानें तो 118 दिनों को गुरु का वक्री होना 1 अंक पर सिमट रहा है। (1+1+8=10, 1+0=1) अंक गणित में 1 अंक सूर्य का माना जाता है। सूर्य सत्ता का कारक माना गया है। ऐसे में राहु का प्रभाव सूर्य के अंक पर देश के कुछ प्रदेशों में सत्ता में परिवर्तन दे सकता है। सत्ता में उलटफेर का दौर भी देखा जा सकता है। अचानक ही कुछ बड़े नेताओं को पद भी छोड़ना पड़ सकता है। जबकि राहु के प्रभाव के कारण नेताओं का वाणी पर संयम नहीं रहेगा। देश व प्रदेश में कुछ नेता बड़े पद प्राप्त करने के लिए एक दूसरे के खिलाफ षड्यंत्र रच सकते हैं। कुछ पार्टी के नेता आपस में ही उलझ कर रह जाएंगे। जिसके कारण किसी और का ही भाग्य उदय हो सकता है। पंडित डोगरा ने कहा कि बृहस्पति के वक्री होने से देश-दुनिया में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेंगे। आर्थिक स्थितियों में अनचाहे बदलाव हो सकते हैं। राजनीति में उतार- चढ़ाव का दौर चलता रहेगा और कई राज्यों में सत्ता परिवर्तन और संगठन में परिवर्तन होगा। अचानक पनपने वाले रोग आम जनमानस में अशान्ति एवं दुख का माहौल पैदा करेंगे। हिंसक घटनाएं होने का भय भी बना रहेगा। उन्होंने बताया कि मिथुन, सिंह, तुला, धनु व मीन राशि के लिए जहां शुभ व लाभप्रद रहेगा। वहीं मेष, वृष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर व कुंभ राशि के जातकों को परेशानी दे सकता है।
पंडित डोगरा ने बताया कि हिमाचल की कर्क राशि है जिस के लिए वक्री शनि व देव गुरु बृहस्पति हिमाचल में राजनीतिक ड्रामा करवा सकता है। नेता पद लेने से भय में रहेंगे और कुछ नेताओं का पद जाना तय है। इस स्थिति से निपटने के लिए लक्ष्मी नारायण सहित हनुमान की भक्ति जातक के लिए कल्याणकारी साबित होगी। देव गुरु बृहस्पति जातक को आत्मिक व आध्यात्मिक शक्ति के साथ साथ विवेक भी प्रदान करते हैं।

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