Thursday, April 18, 2024

इन्सपैक्टर सुनील सांख्यान को तीसरी बार DGP Disc अवॉर्ड

आपकी खबर, शिमला। 

जिला ऊना के हरोली पुलिस थाना में बतौर थाना प्रभारी तैनात इन्सपैक्टर सुनील सांख्यान को अपनी सेवाओं के दौरान बेहतरीन कार्य करने के लिए तीसरी बार DGP Disc अवार्ड (Gold DGP Disc) से सम्मानित किया गया है। रविवार को प्रदेश के महामहिम राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला सहित डीजीपी संजय कुंडू ने सम्मान समारोह के दौरान प्रदेश के बेहतरीन पुलिस अधिकारियों को सम्मानित किया। डीजीपी डिस्क के लिए प्रदेश के 304 पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों में से 4 बेहतरीन पुलिस अधिकारियों को गोल्ड डीजीपी डिस्क से सम्मानित किया गया है। इंस्पेक्टर सुनील सांख्यान भी इन 4 अधिकारियों में शामिल हैं। इंस्पेक्टर सुनील सांख्यान का जन्म 2 मई 1982 को गांव कंजयाण के एक गरीब परिवार में हुआ । सुनील सांख्यान की माता गृहणी व पिता मजदूर हैं । बचपन में सुनील अपने मामा के घर गांव थाना लोहारा में रहे और मामा के पास ही हमीरपुर में ही Silver Bell School में पांचवी कक्षा तक पढ़ें । इसके बाद मैट्रिक SSS Lambloo से की और जमा दो Non Medical boys स्कूल हमीरपुर में करने के बाद NSCB कालेज हमीरपुर में Bsc Non Medical से ग्रैजुएशन पूरी की । बर्ष 2004 में MBA करने GNA IMT फगवाड़ा पंजाब गये और थर्ड समैस्टर में काँलेज से भागकर हमीरपुर में पुलिस कांस्टेबल की भर्ती ज्वाइन की । चार पांच दिन दोस्तों के पास रुकने के बाद भर्ती अटैंड करके सितम्बर 2005 में पुलिस विभाग में बतौर काँस्टेबल भर्ती हुए और 2007 में धर्मशाला में ट्रेनिंग पुरी की ।

सिपाही से सब इंस्पेक्टर बन गए सुनील

ट्रेनिंग के दौरान ही एक दिल छू लेने वाली घटना ने पुलिस से निकलने या रैंक इम्परुव करने का मन बना लिया । हुआ यूं कि ट्रेनिंग के दौरान एक इन्सटैक्टर ने बोल दिया कि पुलिस में गधे और घोड़े एक बराबर होते हैं । सिपाही चाहे आठवीं पास हो या MBA पास सिपाही तो सिपाही ही रहेगा। इस बात ने दिमाग में घर कर दिया और 2008 में Sub Inspector की वकैन्सी निकली और टैस्ट में पार्टीसिपेट भी किया लेकिन सबजैक्टीव टैस्ट में बाहर हो गए परन्तु इनकी ही पलाटून में एक लड़का सब इंस्पेक्टर सेलेक्ट हो गया जबकि यह अपनी पलाटून के परफैक्ट रहे । फिर क्या था टेंशन बढ़ी और फिलींग हुई कि अपने बैच के काँन्सटेबल भाई को कैसे सल्युट करुंगा । बर्ष 2009 में फिर से टेस्ट दिया और पुलिस विभाग में बन गये सब इंस्पेक्टर।

कई आपराधिक वारदातों को सुलझाया

2010 में ट्रैनिंग पास करके 2011, 2012 में प्रोवेशन पिरीयड जिला कुल्लू में पूरा किया । इस दौरान ठगी के 11 मामलों में बेहतरीन कार्य किया और एक नकली आर्मी का मेजर पकड़ा जिसने हिमाचल प्रदेश मे कई जगह आर्मी का आफिसर बनकर ठगी की थी l बर्ष 2013 मे जिला मण्डी में थाना बलदवाड़ा में बतौर प्रभारी रहे और मादक पदार्थ अधिनियम में एक के बाद एक केस देकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया । वर्ष 2014 ,15 व 16 में थाना प्रभारी करसोग रहे जहां पर 2 साल बेहतरीन काम किया । इस दौरान 2 national wide tower fraud gang को उतर प्रदेश और पानीपत से पकड़कर हवालात पहुंचाया । एक के बाद एक 16 चोरी के केस वर्कआउट किए । बर्ष 2013-14 में बेहतरीन कार्य के लिए पहला DGP DISC अवार्ड मिला । बर्ष 2016 में इंस्पेक्टर प्रमोट हुए और जुन्गा में बतौर Chief law instructor रहे और काँन्सटेबल का बैच निकाला । बर्ष 2017-18 में ट्रांसफर होने पर थाना प्रभारी सदर मण्डी रहे । मण्डी में भी चोरों और समगलरों के उपर जबरदस्त शिकंजा कसा । 2 मर्डर केस वर्कआउट किए l बर्ष 2018 में सिटी चौकी मण्डी के एरिया में 20 किलो चांदी और कुछ नकदी, 20 लैपटाँप एक nationwide gang ने चोरी किए जो उक्त केस को 48 घण्टे में वर्कआउट करके Ghodasan gang को हवालात की सैर करवाई और भारतबर्ष में हरियाणा के बाद दूसरी बार Ghodasan gang से पूरी रिकवरी हुई । इस गैंग को दिल्ली से पकड़कर मण्डी की हवालात में पहुचाया । बर्ष 2019 में जिला कुल्लू में ट्रांसफर होते ही तत्कालीन SP द्वारा साईबर सैल का कार्यभार सौंपा । सुनील साख्यान जिला कुल्लू में 2.5 बर्ष तक बतौर साईबर सैल और विशेष अन्वेषण शाखा के प्रभारी रहे l इस दौरान आँनलाईन ठगी के बहुत से केस वर्कआउट किए और लगभग 60लाख रुपये की राशी को रिकवर करवाकर पीङितो को वापिस करवाया । जो बर्ष 2019 के लिये वेहतरीन कार्य के लिए पुलिस विभाग द्वारा दूसरी बार DGP DISC से सम्मानित हुए l 2021 मे हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े मादक पदार्थ के अभियोग 111 किलो चरस और 6.5 किलो (चिट्टा) हैरोईन को पकड़ने मे लीड रोल मे रहे । इसी क्रम में दिल्ली से 40 से अधिक नाईजिरीयन और अफ्रीकन मूल के समगलरों को पकड़ने में अहम भूमिका निभाई जिस कारण बर्ष 2021 के लिये अब तीसरी DGP DISC (Golden) पुलिस विभाग द्वारा दी गई। सुनील सांख्यान ने इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, गुरुजनों ,उच्च अधिकारियो और साथ रही टीम के सदस्यों को दिया है। इंस्पेक्टर सुनील सांख्यान्न का मानना है कि अगर ईमानदारी, मेहनत और लगन से काम किया जाए तो सफलता आपके पीछे खुद भागती है।

 

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