पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर भाजपा कार्यालय दीपकमल शिमला में कार्यक्रम आयोजित
पूर्व मंत्री सुरेश भारद्वाज बोले, दीनदयाल उपाध्याय भारतीय जनसंघ के प्रमुख स्तंभों में से एक
आपकी खबर, शिमला।
11 फरवरी। भारतीय जनता पार्टी द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि के अवसर पर शिमला स्थित पार्टी कार्यालय ‘दीपकमल’ में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यातिथि के रूप में पूर्व शिक्षा मंत्री एवं भाजपा के पूर्व सांसद और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुरेश भारद्वाज उपस्थित रहे। इस अवसर पर पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और विभिन्न प्रकोष्ठों, प्रदेश और मंडल के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम की शुरुआत पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इसके पश्चात वक्ताओं ने उनके जीवन, विचारों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि सुरेश भारद्वाज ने अपने संबोधन में कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय भारतीय जनसंघ के प्रमुख स्तंभों में से एक थे। उन्होंने 1951 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा स्थापित भारतीय जनसंघ को मजबूत संगठन के रूप में खड़ा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे 1951 से 1967 तक लगातार लगभग 14 वर्षों तक जनसंघ के महामंत्री रहे और संगठन को देश के कोने-कोने तक पहुंचाने का कार्य किया।
उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने ‘एकात्म मानववाद’ और ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ जैसे विचारों के माध्यम से भारतीय राजनीति को नई दिशा दी। उनका मानना था कि भारत की प्रगति उसकी सांस्कृतिक जड़ों, परंपराओं और राष्ट्रीय अस्मिता के आधार पर ही संभव है। उन्होंने राजनीति को सत्ता प्राप्ति का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा का माध्यम माना।
सुरेश भारद्वाज ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जीवन सादगी, संगठन कौशल और राष्ट्रभक्ति का अद्वितीय उदाहरण है। उनका विचार था कि देश की राजनीति दल आधारित हो सकती है, लेकिन उसका मूल उद्देश्य राष्ट्रहित और समाज का कल्याण होना चाहिए।
कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं ने भी कहा कि आज भारतीय जनता पार्टी जिस स्वरूप में देश की सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति बनी है, उसकी वैचारिक नींव पंडित दीनदयाल उपाध्याय और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे महापुरुषों ने रखी थी।
अंत में सभी उपस्थित कार्यकर्ताओं ने उनके विचारों पर चलने और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की योजनाएं पहुंचाने का संकल्प लिया।

