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किसान-बागवान संगठन की आक्रोश रैली से थमी राजधानी की रफ्तार

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  • किसान-बागवान संगठन ने हिमाचल में निकाली आक्रोश रैली
  • बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के विरोध में सचिवालय का घेराव किया
  • कांग्रेस ने किया समर्थन, थम गई शिमला की रफ्तार

आपकी खबर, शिमला। 

केंद्र सरकार ने बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी से आम लोगों का जीना दूभर कर दिया है। इसी के विरोध में संयुक्त किसान मंच के बैनर तले प्रदेश के करीब 27 किसान-बागवान संगठनों ने राजधानी शिमला में प्रदर्शन किया।

जन आक्रोश रैली निकाल सचिवालय का घेराव भी किया। किसान-बागवान फलों की पैकेजिंग पर जीएसटी खत्म करने, कश्मीर की तर्ज पर एमआईएस के तहत सेब खरीद करने और सेब पर आयात शुल्क 100 फीसदी करने की मांग कर रहे हैं। बागवान संगठन सरकार की ओर दी गई 6 फीसदी जीएसटी छूट की जटिल प्रक्रिया को सरल बनाने की भी मांग कर रहे हैं। 20 सूत्रीय मांग पत्र में उठाए गए मुद्दों को हल करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनाई गई कमेटी में बागवान प्रतिनिधियों को शामिल न करने से भी बागवान संगठन नाराज हैं। संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान और सह संयोजक संजय चौहान का कहना है कि केंद्र सरकार की नाकामी से किसान बागवान आहत हो गए हैं। बैंकों से लोन लेकर फसल तैयार की जा रही है। उसके बाद फसलों का उचित दाम तक नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में किसानों और बागवानों को आत्महत्या करने तक की नौबत आ गई है। इसी के विरोध में आज जन आक्रोश रैली आयोजित की गई।

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