न्यू कॉम्प्लेक्स नीति में विद्यालयों की प्रशासनिक संरचना स्पष्ट हो : विनोद सूद
शिक्षकों की विभिन्न श्रेणियों की भूमिकाएं तय करने, क्लस्टर व ब्लॉक प्रोजेक्ट ऑफिसर के पद सृजित करने की मांग
आपकी खबर, ब्यूरो।
शिमला, 1 सितंबर। हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ की प्रांत कार्यकारिणी की बैठक धर्मशाला में आयोजित हुई। बैठक में प्रदेशभर से आए कार्यकर्ताओं ने शिक्षा व्यवस्था, शिक्षकों की सेवा संबंधी समस्याओं तथा लंबित मांगों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में महासंघ की ओर से सरकार को सौंपे जाने वाले 36 सूत्रीय मांग-पत्र पर भी चर्चा कर विभिन्न सुझावों को शामिल करने का निर्णय लिया गया।
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री महेंद्र कपूर ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम है। शिक्षक का दायित्व केवल विद्यार्थियों को विषयगत ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि राष्ट्रहित के मूल उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए उच्च स्तर के गुणवत्तापूर्ण नागरिकों का निर्माण करना भी है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण दायित्व को वही कार्यकर्ता बेहतर ढंग से समझ सकता है, जो शिक्षा के मर्म और उसके व्यापक उद्देश्य को समझता हो।
महासंघ के प्रांत अध्यक्ष विनोद सूद ने कार्यकर्ताओं का स्वागत करते हुए कहा कि न्यू कॉम्प्लेक्स नीति में विद्यालयों की प्रशासनिक संरचना को स्पष्ट किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में सीएचटी और बीईईओ की भूमिका स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि नई व्यवस्था में इन पदों का अस्तित्व किस स्वरूप में रहेगा।
उन्होंने मांग की कि सीएचटी, बीईईओ, जेबीटी, एचटी, सीएंडवी, टीजीटी, लेक्चरर तथा प्रधानाचार्य सहित सभी शिक्षक एवं प्रशासनिक पदों की भूमिका, अधिकार और जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से निर्धारित की जाएं। साथ ही न्यू कॉम्प्लेक्स व्यवस्था में शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति नीति भी स्पष्ट की जाए।
महासंघ ने प्राथमिक स्तर पर जेबीटी कैडर से क्लस्टर प्रोजेक्ट ऑफिसर तथा माध्यमिक स्तर पर प्रधानाचार्य कैडर से क्लस्टर प्रोजेक्ट ऑफिसर के पद सृजित करने की मांग की। इसी प्रकार प्राथमिक स्तर के लिए जेबीटी कैडर से तथा उच्च माध्यमिक स्तर के लिए प्रधानाचार्य कैडर से ब्लॉक प्रोजेक्ट ऑफिसर के पद सृजित कर उनकी जिम्मेदारियां एवं अधिकार निर्धारित करने की मांग की गई।
बैठक में 36 सूत्रीय मांग-पत्र पर बनी सहमति
बैठक में 36 सूत्रीय मांग-पत्र पर चर्चा के बाद प्रांत कार्यकारिणी के सुझावों एवं निर्णयों के अनुरूप मांग-पत्र हिमाचल प्रदेश सरकार को सौंपने का निर्णय लिया गया। प्रमुख मांगों में
शिक्षा विभाग में 20 वर्षों से कार्यरत कंप्यूटर शिक्षकों के लिए तर्कसंगत नीति बनाकर उन्हें विभाग के अधीन लिया जाए।
वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाओं में कार्यरत सभी डीपीई को प्रवक्ता शारीरिक शिक्षा का दर्जा दिया जाए।
सभी वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाओं में उप-प्रधानाचार्य के पद सृजित कर वित्तीय लाभ दिए जाएं। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय के अधीन टीजीटी एवं सीएंडवी कैडर को उच्च शिक्षा निदेशक के अधीन किया जाए। नए अपग्रेड हुए वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में प्रवक्ता शारीरिक शिक्षा के पद सृजित किए जाएं। कर्मचारियों के लिए मेडिकल प्रतिपूर्ति के स्थान पर कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू की जाए।
300 से अधिक अर्जित अवकाश को लैप्स न किया जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर उपयोग की सुविधा दी जाए। वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में कंप्यूटर के साथ शारीरिक शिक्षा विषय का विकल्प भी उपलब्ध करवाया जाए। टीजीटी कला एवं विज्ञान को प्रवक्ता आईपी पद पर पदोन्नति के लिए पांच वर्ष की शर्त समाप्त की जाए।
वर्ष 2000 में नियुक्त विद्या उपासकों को न्यायालय द्वारा देय वेतनवृद्धि का लाभ दिया जाए। सभी प्राथमिक विद्यालयों में एनटीटी शिक्षकों की नियमित नियुक्ति की जाए। माध्यमिक विद्यालयों में पीईटी एवं डीएम के रिक्त पद भरे जाएं। केंद्रीय प्राथमिक विद्यालयों में खेलों को बढ़ावा देने के लिए पीईटी पद सृजित किए जाएं।
शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 58 से बढ़ाकर 60 वर्ष की जाए।
सभी विद्यालयों में टीजीटी हिंदी के पद सृजित किए जाएं।
वर्ष 2008 से 22 अक्टूबर 2009 के मध्य नियुक्त टीजीटी एवं सीएंडवी शिक्षकों को नियुक्ति तिथि से पुराने आरएंडपी नियमों के अनुसार नियमित किया जाए। 4-9-14 की व्यवस्था को पूरे सेवाकाल में एक बार देने के प्रावधान का विरोध करते हुए 7-7-2014 की अधिसूचना निरस्त कर पूर्व स्थिति बहाल की जाए।
प्रधानाचार्य पद पर नियुक्तियां शीघ्र नियमित की जाएं और भविष्य में नियमित नियुक्तियां ही की जाएं। कंप्यूटर साइंस के विद्यार्थियों से लिया जाने वाला 110 रुपये शुल्क बंद किया जाए।
टीजीटी हिंदी एवं संस्कृत को टीजीटी के सभी वित्तीय लाभ दिए जाएं।
साथ ही जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षकों को न्यूनतम 2500 रुपये जनजातीय भत्ता दिया जाए। शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से पूर्णतः मुक्त किया जाए। एक ही परिसर में संचालित प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च एवं वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों की प्रार्थना सभा एक साथ आयोजित करने के निर्देश दिए जाएं।
मुख्य अध्यापकों के लिए प्रधानाचार्यों की मोटिवेशनल वर्कशॉप आयोजित की जाएं तथा उत्कृष्ट विद्यालयों की गतिविधियों से उन्हें प्रेरित किया जाए। निरीक्षण के दौरान शिक्षा अधिकारियों के व्यवहार में सुधार तथा विद्यालयों को रचनात्मक सुझाव देने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए।
26 अप्रैल 2010 से पहले नियुक्त टीजीटी को पदोन्नति में पूर्व की तरह मुख्य अध्यापक एवं प्रवक्ता दोनों विकल्प बहाल किए जाएं।
मुख्य अध्यापक, प्रधानाचार्य एवं खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों की पदोन्नति के बाद प्रशिक्षण तथा मोटिवेशनल वर्कशॉप अनिवार्य की जाए।
वर्ष 2012 से पूर्व जेबीटी से पदोन्नत एचटी को भी वेतनवृद्धि का लाभ दिया जाए। प्रवक्ता स्कूल न्यू के स्थान पर केवल प्रवक्ता पदनाम किया जाए तथा 1986 के आरएंडपी नियम बहाल किए जाएं।
2011 से पहले नियुक्त भाषा अध्यापक एवं ओटी शिक्षकों को टीईटी की बाध्यता से छूट दी जाए तथा जनजातीय व दुर्गम क्षेत्रों में रिक्त पद भरे जाएं और कार्यरत शिक्षकों को विशेष वित्तीय लाभ दिए जाएं। नए पे-स्केल के एरियर एवं लंबित महंगाई भत्ते का भुगतान शीघ्र किया जाए।
सीएंडवी शिक्षकों की तर्ज पर सभी शिक्षकों को 20 वर्ष की सेवा पूर्ण होने पर दो विशेष वेतनवृद्धियां दी जाएं। सभी शिक्षकों के अनुबंध काल को ओपीएस के लाभ के लिए सेवा में शामिल किया जाए।
जनजातीय एवं दुर्गम क्षेत्रों में विज्ञान एवं कॉमर्स के सभी रिक्त पद भरे जाएं। शिक्षा विभाग में कार्यरत वोकेशनल शिक्षकों के लिए तर्कसंगत नीति बनाकर उन्हें विभाग के अधीन लिया जाए।
एसएमसी शिक्षकों के लिए भी तर्कसंगत नीति बनाकर उनके भविष्य को सुरक्षित किया जाए।
बैठक में शिक्षकों के लंबित महंगाई भत्ते, पे-कमीशन के एरियर तथा वेतन संबंधी विभिन्न विसंगतियों पर भी चर्चा की गई।
महासंघ के प्रांत मीडिया प्रमुख शशि शर्मा ने कहा कि शिक्षकों की लंबित मांगों को लेकर शीघ्र ही हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री से मुलाकात करेगा और 36 सूत्रीय मांग-पत्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत कर उनके शीघ्र समाधान की मांग करेगा।
