सहायक वन रक्षक भर्ती के विरोध में वन कर्मचारी महासंघ ने जताया विरोध, मंत्री को सौंपा ज्ञापन
आउटसोर्स भर्ती से जंगलों की सुरक्षा पर पड़ेगा असर: वन अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ
वन रक्षकों की आउटसोर्स भर्ती का विरोध तेज, महासंघ ने सरकार से पुनर्विचार की मांग की
आपकी खबर, ब्यूरो।
शिमला, 3 मई। सरकार की ओर से प्रस्तावित सहायक वन रक्षक भर्ती प्रक्रिया के विरोध में वन अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ ने शनिवार को पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास मंत्री को ज्ञापन सौंपकर इस निर्णय पर पुनर्विचार की मांग उठाई।
रविवार को वन अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ, वन मंडल शिमला के प्रतिनिधिमंडल ने वन वृत्त शिमला के प्रधान दिनेश शर्मा की अध्यक्षता में पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह से मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने सरकार द्वारा प्रस्तावित सहायक वन रक्षक भर्ती के विरोध में ज्ञापन सौंपा।
महासंघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि वन रक्षक नियमित रूप से दिन-रात अपनी सेवाएं देते हैं और जंगलों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनका कहना था कि आउटसोर्स माध्यम से की जाने वाली अस्थायी वन रक्षकों की भर्ती से विभाग की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है।
महासंघ के अनुसार, आउटसोर्स कर्मचारियों में नियमित कर्मचारियों की तुलना में अनुभव और जवाबदेही की कमी रहती है, जिससे वे उतनी प्रभावी सेवाएं नहीं दे पाएंगे। प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से रात्रि के समय होने वाले अवैध कार्यों और वन अपराधों की रोकथाम को लेकर चिंता जताई। उनका कहना था कि इससे जंगलों की सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से मांग की कि प्रस्तावित भर्ती प्रक्रिया पर पुनर्विचार किया जाए तथा विभाग में कार्यरत कर्मचारियों के हितों और जंगलों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उचित निर्णय लिया जाए।
पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और उनकी चिंताओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि सरकार सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेगी।
