HPU शिमला में एसएफआई ने वित्त अधिकारी को सौंपा ज्ञापन, छात्र हितों के मुद्दों पर उठाई आवाज
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में एसएफआई का प्रदर्शन, बस सेवा और हॉस्टल सुविधाओं को लेकर सौंपा ज्ञापन
HPU में पारदर्शिता और सुविधाओं की मांग, एसएफआई ने फाइनेंस कमेटी की कार्यवाही सार्वजनिक करने की उठाई मांग
आपकी खबर, शिमला।
17 फरवरी। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, समरहिल शिमला में छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर मंगलवार को Students’ Federation of India (एसएफआई) इकाई ने वित्त अधिकारी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने विश्वविद्यालय में पारदर्शिता, परिवहन व्यवस्था और छात्रावासों की स्थिति सुधारने जैसी प्रमुख मांगों को उठाया है।
एसएफआई ने अपने ज्ञापन में कहा कि विश्वविद्यालय की फाइनेंस कमेटी की बैठक 10 दिसंबर 2025 को आयोजित हुई थी, लेकिन अब तक उसकी कार्यवाही सार्वजनिक नहीं की गई है। संगठन का कहना है कि वित्तीय निर्णयों का सीधा प्रभाव छात्रों पर पड़ता है, इसलिए यह आवश्यक है कि बजट, खर्च और स्वीकृत प्रस्तावों की जानकारी सभी के सामने लाई जाए।
संगठन ने प्रशासन से मांग की कि वित्त समिति की कार्यवाही को जल्द से जल्द सार्वजनिक किया जाए और भविष्य में इसे नियमित रूप से आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया जाए, ताकि प्रशासनिक प्रक्रिया पारदर्शी और जवाबदेह बन सके।
ज्ञापन में विश्वविद्यालय परिसर में परिवहन व्यवस्था की खराब स्थिति का भी मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। एसएफआई के अनुसार पहले छात्रों के लिए 8 बसें उपलब्ध थीं और वर्तमान में केवल 3 बसें ही संचालित हो रही हैं।
इस कारण हजारों छात्रों को रोजाना कक्षाओं तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। संगठन ने मांग की कि नई बसों की तत्काल खरीद की जाए, मौजूदा बसों का नियमित रखरखाव किया जाए, बसों की समय-सारणी को सुव्यवस्थित किया जाए।
एसएफआई ने लड़कों और लड़कियों के छात्रावासों की खराब स्थिति पर भी चिंता जताई। ज्ञापन में मांग की गई कि छात्रावासों के नवीनीकरण के लिए कुल कितनी राशि स्वीकृत हुई है, अब तक उसमें से कितना खर्च किया गया है।
संगठन ने कहा कि कई हॉस्टलों में शौचालयों की मरम्मत, बिजली व्यवस्था और कमरों की हालत सुधारने की तत्काल आवश्यकता है, लेकिन अभी तक कोई ठोस प्रगति नहीं दिख रही है।
एसएफआई ने अपने प्रेस बयान में कहा कि विश्वविद्यालय केवल भवन नहीं, बल्कि छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों का साझा शैक्षणिक समुदाय है। इसलिए प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह छात्र हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
संगठन ने स्पष्ट किया कि यह ज्ञापन किसी टकराव के लिए नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और रचनात्मक संवाद के तहत सौंपा गया है। एसएफआई ने वित्त अधिकारी से इन मुद्दों पर जल्द सकारात्मक कदम उठाने और छात्र प्रतिनिधियों के साथ बैठक करने की मांग की है।
एसएफआई का मानना है कि विश्वविद्यालय में पारदर्शिता और भागीदारी से ही स्वस्थ शैक्षणिक माहौल बन सकता है। संगठन ने चेतावनी भी दी कि यदि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो छात्रों के साथ मिलकर लोकतांत्रिक तरीके से आगे की रणनीति बनाई जाएगी।

