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    सुन्नी नागरिक औषधालय में अल्ट्रासाउंड सुविधा नहीं, मरीज निजी केंद्रों के सहारे

    अल्ट्रासाउंड मशीन के अभाव से बढ़ी परेशानी, सुन्नी के मरीजों पर आर्थिक बोझ
    aapkikhabarBy aapkikhabarMarch 3, 2026Updated:March 3, 2026No Comments3 Mins Read
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    सुन्नी नागरिक औषधालय में अल्ट्रासाउंड सुविधा नहीं, मरीज निजी केंद्रों के सहारे

    अल्ट्रासाउंड मशीन के अभाव से बढ़ी परेशानी, सुन्नी के मरीजों पर आर्थिक बोझ

    आपकी खबर, शिमला/सुन्नी।

    3 मार्च। शिमला ग्रामीण के सुन्नी स्थित नागरिक औषधालय में अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा उपलब्ध न होने के कारण क्षेत्र के लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों को मजबूरी में निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है।

    स्थानीय लोगों के अनुसार औषधालय में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं, जिनमें गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग तथा पेट व अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीज शामिल हैं। डॉक्टरों द्वारा कई मामलों में अल्ट्रासाउंड जांच की सलाह दी जाती है, लेकिन सुविधा न होने के कारण मरीजों को या तो शिमला या आसपास के निजी केंद्रों में जाना पड़ता है। इससे न केवल समय की बर्बादी होती है बल्कि यात्रा व जांच का खर्च अलग से उठाना पड़ता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार सरकारी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड सुविधा उपलब्ध होने से मरीजों को बड़ी राहत मिलती है और निजी केंद्रों में 700 से 1000 रुपये तक खर्च होने से बचत होती है। कई स्थानों पर जब सरकारी अस्पतालों में यह सुविधा उपलब्ध नहीं होती, तो मरीजों को निजी केंद्रों पर ही निर्भर रहना पड़ता है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ जाता है।

    सुन्नी क्षेत्र में अल्ट्रासाउंड सुविधा का अभाव विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। नियमित जांच के लिए उन्हें बार-बार दूर जाना पड़ता है, जिससे जोखिम भी बढ़ जाता है। कई महिलाओं ने बताया कि समय पर जांच न होने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बना रहता है।

    स्थानीय निवासी एवं वरिष्ठ समाजसेवी एनएस वर्मा, शिवानी ठाकुर, नारायण सिंह, टेक चंद, पुष्पा ठाकुर, महेश शर्मा, रोशन लाल, छविंद्र पाल, गिरधारी लाल, ओमप्रकाश, तारादत्त आदि ने बताया कि औषधालय में अव्यवस्था का आलम है। आज तक यहां पर अल्ट्रासाउंड की सुविधा तक नहीं दी गई है। ये क्षेत्र करसोग से भी लगता है। मजबूरन लोगों को या तो करसोग या फिर शिमला जाना पड़ता है। इसके लिए उन्हें निजी गाड़ियों का सहारा लेना पड़ता है, जिसमें भारी भरकम पैसा खर्च करना पड़ता है। इनका कहना है कि सरकार के नुमाइंदे यहां पर बेड की अधिक संख्या बढ़ाने की बात करते हैं। उन्हें हम कहना चाहते हैं कि बेड बढ़ाने से कुछ नहीं होगा जब तक अस्पताल में सुविधा नहीं दी जाएगी।

    क्षेत्रवासियों का कहना है कि सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अभी भी कई जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। लोगों ने मांग की है कि सुन्नी नागरिक औषधालय में जल्द से जल्द अल्ट्रासाउंड मशीन उपलब्ध कराई जाए और रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति की जाए, ताकि मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही यह सुविधा मिल सके।

    स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने स्वास्थ्य विभाग से इस समस्या का स्थाई समाधान निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि अस्पताल में यह सुविधा शुरू हो जाती है तो आसपास के कई गांवों के लोगों को राहत मिलेगी और उन्हें निजी केंद्रों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

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