मशोबरा में स्वयं सहायता समूहों के लिए कार्यशाला, बाजार में सफलता और वित्तीय प्रबंधन पर दिया जोर
75 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा, स्वयं सहायता समूहों को उत्पाद सुधार और बाजार रणनीति की जानकारी
रैंप कार्यक्रम के तहत मशोबरा में कार्यशाला, SHG सदस्यों को ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मूल्य निर्धारण का प्रशिक्षण
आपकी खबर, ब्यूरो।
मशोबरा (शिमला), 8 सितंबर। उद्योग विभाग, हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए संचालित रैंप कार्यक्रम के अंतर्गत मशोबरा में स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के लिए “बाज़ार में सफलता, स्थिरता और वित्तीय प्रबंधन” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों को उनके उत्पादों और व्यवसाय से जुड़ी कमियों की पहचान करने तथा उनमें आवश्यक सुधार के माध्यम से बाजार तक पहुंच, बिक्री और व्यवसाय की स्थिरता को बेहतर बनाने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करना रहा।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ-साथ पैकेजिंग, ब्रांडिंग, उचित मूल्य निर्धारण और ग्राहकों की पसंद को समझने के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि बदलती बाजार आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पादों में समय-समय पर सुधार करना स्वयं सहायता समूहों को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यशाला में 75 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। उद्योग विभाग, शिमला की विस्तार अधिकारी सुश्री समृति गुलेरिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। इस अवसर पर उद्योग विभाग के अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
कार्यशाला में स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों ने सक्रिय रूप से भाग लेते हुए अपने उत्पादों, बाजार में आ रही चुनौतियों और व्यवसाय को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की। प्रतिभागियों ने उत्पादों की गुणवत्ता और प्रस्तुति में सुधार, बाजार की मांग के अनुरूप बदलाव तथा बिक्री बढ़ाने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को अपनी मौजूदा कमियों को पहचानकर उनमें सुधार करने तथा अपने उत्पादों को अधिक गुणवत्तापूर्ण, प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ बनाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यशाला का उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर कार्य कर रहे स्वयं सहायता समूहों को बेहतर बाजार अवसर उपलब्ध कराने, उनके व्यवसाय को मजबूत करने और उन्हें आर्थिक रूप से अधिक सक्षम बनाने की दिशा में जागरूक एवं प्रोत्साहित करना रहा।
