देशी बीजों और प्राकृतिक खेती के लिए मंडी के सोम कृष्ण सम्मानित
नौणी विश्वविद्यालय में मिला बेस्ट फार्मर और बेस्ट सीड सेवर अवार्ड
आपकी खबर, सोलन।
20 फरवरी। औद्योगिक एवं बागवानी विश्वविद्यालय नौणी (सोलन) की ओर से सतत कृषि हेतु प्राकृतिक खेती आधारित बीज उत्पादन विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में मंडी जिला से संबंध रखने वाले प्रगतिशील किसान सोम कृष्ण को देशी बीजों के संरक्षण और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए बेस्ट फार्मर और बेस्ट सीड सेवर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
यह सम्मान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राजेश्वर सिंह चंदेल ने प्रदान किया। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए किसानों, कृषि विशेषज्ञों और शोधार्थियों ने भाग लिया।
सम्मानित किसान सोम कृष्ण ने लंबे समय से विलुप्त होते जा रहे देशी बीजों के संरक्षण के लिए कार्य किया है। उन्होंने अपने खेतों में क्रॉप डाइवर्सिटी ब्लॉक स्थापित कर विभिन्न पारंपरिक बीजों का उत्पादन किया और अन्य किसानों के साथ बीजों का आदान-प्रदान कर उन्हें उपलब्ध कराया।
उन्होंने “बीज खोजो यात्रा”, “बीज मेला” और बीज आदान-प्रदान अभियान के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में देशी बीजों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का कार्य किया है, जिससे किसानों की लागत कम हुई और आत्मनिर्भरता बढ़ी।
5000 से अधिक किसानों को दिया प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने अब तक 5000 से अधिक किसानों को प्रशिक्षण प्रदान किया है।
इस प्रशिक्षण में देशी बीजों का उपयोग, प्राकृतिक/जैविक घटकों की तैयारी, रासायनिक मुक्त खेती की तकनीक, मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई।
किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य
प्रगतिशील किसान सोम कृष्ण का उद्देश्य केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करना, प्राकृतिक उत्पादों को उचित मूल्य दिलाना और स्वास्थ्य व पर्यावरण की रक्षा करना भी है।
प्राकृतिक खेती के माध्यम से उन्होंने किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन और बाज़ार उपलब्ध कराने की दिशा में भी सराहनीय प्रयास किए हैं।
सम्मान प्राप्त करने के बाद किसान ने विश्वविद्यालय और कुलपति डॉ. राजेश्वर सिंह चंदेल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन और प्रेरणा से ही वे इस सम्मान के योग्य बन पाए हैं। उन्होंने कहा कि वे आगे भी देशी बीजों के संरक्षण और प्राकृतिक खेती के प्रसार के लिए कार्य करते रहेंगे।
यह सम्मान न केवल एक किसान की उपलब्धि है, बल्कि यह पूरे प्रदेश के किसानों के लिए एक प्रेरणा है कि प्राकृतिक खेती और देशी बीजों के माध्यम से खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाया जा सकता है।

