नए मुख्यमंत्री कार्यालय पर भाजपा विधायक सुधीर शर्मा का तंज, जानिए क्या कहा
बोले—कार्यालय के लिए ₹50 करोड़, लेकिन कैंपस के लिए 20 करोड़ नहीं, ऐसी परिस्थिति न बनाए की प्रदेश केंद्र शासित प्रदेश न बन जाए
आपकी खबर, ब्यूरो
शिमला, 21 सितंबर। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नए कार्यालय को लेकर भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने सरकार पर निशाना साधा है। सुधीर शर्मा ने नए मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्माण और उस पर होने वाले खर्च को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश में आर्थिक संसाधनों की कमी के बीच सरकार को प्राथमिकताओं पर विचार करना चाहिए।
सुधीर शर्मा ने मुख्यमंत्री के नए कार्यालय को लेकर प्रदेशवासियों को तंज के अंदाज में बधाई देते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री को सचिवालय में नया कार्यालय मिल रहा है। इस कार्यालय के निर्माण पर करीब 50 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। आज तक किसी मुख्यमंत्री को ₹50 करोड़ के कार्यालय की जरूरत नहीं पड़ी”सुधीर शर्मा ने कहा कि प्रदेश के इतिहास में ऐसा उदाहरण नहीं रहा कि किसी मुख्यमंत्री के कार्यालय के निर्माण पर इतनी बड़ी राशि खर्च की गई हो। अब लोग वैसे भी सचिवालय जाना ही नही चाहते है।
एक तरफ सरकार आर्थिक तंगी का रोना रो रही है वही मुख्यमंत्री अपने लिए आलीशान कार्यालय पर करोड़ो रूपये खर्च कर रहे है
सुधीर शर्मा ने में सेंटर यूनिवर्सिटी के नॉर्थ कैंपस का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार नए मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्माण के लिए 50 करोड़ राशि खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर विश्वविद्यालय परिसर के निर्माण के लिए ₹20 करोड़ नही दे पा रहे है।
सुधीर शर्मा ने सरकार से सवाल किया कि विकास और शिक्षा से जुड़े संस्थानों के लिए धन की कमी क्यों बताई जा रही है, जबकि मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्माण के लिए इतनी बड़ी राशि खर्च की जा रही है।
सुधीर शर्मा ने नए कार्यालय में लगाए गए फर्नीचर को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि नए कार्यालय में लगाए गए कुछ सोफों की कीमत प्रति सोफा ₹6 से ₹7 लाख तक बताई जा रही है और उनके बाकायदा बिल बनाए गए हैं।
सुधीर शर्मा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर भी सवाल किए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ऐसे हालात पैदा नहीं होने चाहिए कि आने वाले समय में राज्य के पास कुछ भी शेष न रहे।
उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी स्थिति नहीं बनानी चाहिए कि “प्रदेश, प्रदेश न रहे, कहीं केंद्र शासित प्रदेश न बन जाए।”
