नेपाल में एसजेवीएन की जलविद्युत परियोजनाओं को गति देने के लिए भूपेंद्र गुप्ता ने की उच्चस्तरीय बैठकें
अरुण-3 और लोअर अरुण परियोजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी लाने पर नेपाल सरकार के साथ हुई चर्चा
आपकी खबर, ब्यूरो।
शिमला, 2 नवंबर। एसजेवीएन के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक भूपेंद्र गुप्ता ने नेपाल में कंपनी की जलविद्युत परियोजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी लाने के उद्देश्य से काठमांडू में नेपाल सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों एवं अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठकें कीं।
इन बैठकों में नेपाल के वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले, ऊर्जा, जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्री बिराज भक्त श्रेष्ठ तथा निवेश बोर्ड नेपाल (आईबीएन) की मुख्य कार्यकारी अधिकारी यांकी उक्याब के साथ विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान वित्त सचिव, आईबीएन के संयुक्त सचिव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
भूपेंद्र गुप्ता के साथ एसजेवीएन के निदेशक (वित्त) पार्थजीत डे, निदेशक (परियोजनाएं) राजेश कुमार चंदेल तथा एसएपीडीसी एवं एसएलपीडीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पंकज चौधरी भी उपस्थित रहे।
बैठकों में नेपाल में एसजेवीएन की 900 मेगावाट क्षमता वाली अरुण-3 जलविद्युत परियोजना, इससे जुड़ी 217 किलोमीटर लंबी विद्युत पारेषण लाइन और 669 मेगावाट क्षमता वाली लोअर अरुण जलविद्युत परियोजना के कार्यान्वयन में तेजी लाने पर विशेष जोर दिया गया।
चर्चा के दौरान अरुण-3 परियोजना के शेष कार्यों को शीघ्र पूरा करने, पारेषण लाइन के निर्माण में आ रही भूमि संबंधी समस्याओं और वन स्वीकृति से जुड़ी बाधाओं को दूर करने के मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। इसके अलावा लोअर अरुण जलविद्युत परियोजना के निर्माण से पहले की आवश्यक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी अनुमतियां एवं स्वीकृतियां प्राप्त करने पर भी विचार-विमर्श किया गया।
बैठकों में नेपाल सरकार और एसजेवीएन प्रबंधन ने परियोजनाओं से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए संबंधित विभागों एवं प्राधिकरणों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर सहमति जताई। साथ ही इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने के लिए संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया गया।
एसजेवीएन अपनी अधीनस्थ कंपनियों एसएपीडीसी एवं एसएलपीडीसी के माध्यम से नेपाल में जलविद्युत क्षेत्र में भारत-नेपाल सहयोग को नई गति देने में जुटा है। इन परियोजनाओं से न केवल क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि स्वच्छ एवं सतत ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ दोनों देशों के आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
