
बरोहकड़ी में पांच किस्म के राजमाह का PVS, किसानों को बताए देशी बीजों के संरक्षण के तरीके
आपकी खबर, ब्यूरो
निहरी, मंडी, 6 अक्तूबर। ग्राम पंचायत घरोट के गांव बरोहकड़ी में प्रोग्रेसिव किसान कृष्णा देवी के क्रॉप डाइवर्सिटी ब्लॉक में पांच प्रकार के राजमाह की किस्मों का पार्टिसिपेटरी वैरायटी सिलेक्शन (PVS) कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में किसानों, विद्यार्थियों और कृषि विभाग से जुड़े अधिकारियों ने भाग लेकर प्राकृतिक खेती एवं देशी बीजों के महत्व पर जानकारी साझा की।

कार्यक्रम में खंड तकनीकी प्रबंधक रवि कुमार, सहायक खंड तकनीकी प्रबंधक मुरारी लाल, वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय घरोट बरोहकड़ी के उपप्रधानाचार्य जितेंद्र कुमार, प्रवक्ता राजनीतिक शास्त्र खेमराज ठाकुर, ग्राम पंचायत घरोट की प्रधान बेला ठाकुर सहित 20 महिला किसानों, 10 पुरुष किसानों तथा 30 विद्यार्थियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान किसानों और विद्यार्थियों को अनाज और देशी बीजों के बीच अंतर, देशी बीजों के महत्व तथा इनके संरक्षण की पारंपरिक विधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। उपस्थित प्रतिभागियों को बताया गया कि देशी बीज किस प्रकार तैयार किए जाते हैं और उनकी शुद्धता एवं गुणवत्ता बनाए रखने के लिए किस तरह उनका चयन, संरक्षण, भंडारण और रखरखाव किया जाना चाहिए।
मिलेट्स फेलो, जिला मंडी सोम कृष्ण ने विद्यार्थियों के साथ प्राकृतिक खेती के विषय पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने प्राकृतिक खेती की आवश्यकता, इसके लाभ तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पारंपरिक संसाधनों के उपयोग के बारे में विद्यार्थियों को जागरूक किया।
वहीं, खंड तकनीकी प्रबंधक रवि कुमार ने प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं की जानकारी देते हुए किसानों को रासायनिक खेती पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने प्राकृतिक खेती से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षित खाद्य उत्पादन के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के आयोजकों ने सभी अतिथियों, अधिकारियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। विशेष रूप से उन किसानों का धन्यवाद किया गया, जो पिछले कुछ समय से प्राकृतिक खेती को अपना रहे हैं। किसानों ने भविष्य में देशी बीजों के संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में भी कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया।
कार्यक्रम में पांच प्रकार के राजमाह की किस्मों का प्रत्यक्ष अवलोकन एवं चयन किसानों के लिए खास आकर्षण का केंद्र रहा। इस पहल को स्थानीय फसलों की विविधता और पारंपरिक बीजों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
