AI समिट विवाद में सियासत तेज: रणधीर शर्मा ने मुख्यमंत्री और CMO की भूमिका पर उठाए सवाल
AI Impact Summit प्रकरण: भाजपा का बड़ा हमला, CM पर लगाए राष्ट्रविरोधी कृत्य के आरोप
हिमाचल की राजनीति में भूचाल: AI समिट मामले में केंद्रीय जांच की मांग, CMO पर निशाना
आपकी खबर, शिमला।
28 फरवरी। भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी एवं विधायक रणधीर शर्मा ने शनिवार को पत्रकारों को संबोधित किया। उन्होंने प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार पर बड़े आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि बीते 20 फरवरी को दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया अर्धनग्न प्रदर्शन राष्ट्रविरोधी कृत्य था, क्योंकि उस समय 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि भारत की मेजबानी में उपस्थित थे। यह आयोजन भारतीय जनता पार्टी का नहीं, बल्कि भारत सरकार का था, इसलिए उस प्रदर्शन से भाजपा की नहीं बल्कि देश की छवि धूमिल हुई।
रणधीर शर्मा ने आरोप लगाया कि इस राष्ट्रविरोधी गतिविधि के सूत्रधार स्वयं मुख्यमंत्री सुक्खू हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा की परंपराओं और नियमों की अनदेखी करते हुए आरडीजी (Revenue Deficit Grant) के मुद्दे को राजनीतिक उद्देश्य से आगे बढ़ाया और राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव लाने की संवैधानिक प्रक्रिया को दरकिनार किया।
उन्होंने कहा कि 16 मार्च 2026 से प्रारंभ हुए बजट सत्र में परंपरा के अनुसार राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव लाया जाना चाहिए था, किंतु सरकार ने आरडीजी के मुद्दे पर सरकारी संकल्प लाकर तीन दिन तक चर्चा करवाई। 18 फरवरी को प्रस्ताव पारित होते ही सदन स्थगित कर दिया गया। शर्मा ने प्रश्न उठाया कि क्या मुख्यमंत्री और उनके मंत्री आरडीजी बहाली की मांग को लेकर प्रधानमंत्री या वित्तमंत्री से मिले? “दिल्ली जाकर उन्होंने आरडीजी पर कोई पहल नहीं की, बल्कि कांग्रेस नेताओं से मुलाकात की और 20 फरवरी के राष्ट्रविरोधी कृत्य की जिम्मेदारी ली,” उन्होंने आरोप लगाया।
भाजपा नेता ने कहा कि प्रदर्शन में शामिल व्यक्तियों को हिमाचल सदन में ठहराया गया, जिसकी पुष्टि स्वयं मुख्यमंत्री ने की है। मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि कमरों की बुकिंग उनके कार्यालय से हुई। यह स्पष्ट करता है कि मुख्यमंत्री कार्यालय की भूमिका की निष्पक्ष जांच आवश्यक है, उन्होंने कहा।
रणधीर शर्मा ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस द्वारा मामला दर्ज करने और आरोपियों को पकड़ने की कार्रवाई के बाद उन्हें हिमाचल लाया गया और चिड़गांव जैसे दूरस्थ क्षेत्र में सरकारी संरक्षण में ठहराया गया। जब दिल्ली पुलिस विधिसम्मत दस्तावेजों और न्यायालय से अनुमति प्राप्त कर आरोपियों को लेकर लौट रही थी, तब हिमाचल पुलिस द्वारा उन्हें रोका गया और पुलिस अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई मुख्यमंत्री के दबाव में की गई प्रतीत होती है।
उन्होंने कहा कि “यह स्पष्ट है कि आरोपियों को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए गए। मुख्यमंत्री ने पहले ही संरक्षण की जिम्मेदारी ली थी, इसलिए पुलिस की कार्रवाई भी राजनीतिक निर्देशों पर हुई।” भाजपा ने मांग की कि पूरे घटनाक्रम की जांच किसी केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए और विशेष रूप से मुख्यमंत्री तथा मुख्यमंत्री कार्यालय की भूमिका की जांच हो।
रणधीर शर्मा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश शांतिप्रिय और देशभक्त प्रदेश है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रदेश का मुख्यमंत्री संवैधानिक मर्यादाओं को ठेस पहुंचाते हुए एक कांग्रेसी नेता की तरह व्यवहार कर रहा है। प्रदेश की जनता और सदन को गुमराह कर राष्ट्रविरोधी गतिविधि को अंजाम देना अक्षम्य है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस हाईकमान द्वारा तीन वर्ष के कार्यकाल की समीक्षा के बीच अपनी कुर्सी बचाने के लिए मुख्यमंत्री ने यह राजनीतिक कदम उठाया। “प्रदेश हितों की पैरवी करने के बजाय हाईकमान को खुश करने की राजनीति की गई,” उन्होंने कहा।
भाजपा ने स्पष्ट किया कि वह इस पूरे मामले में निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग करती है, ताकि यह सामने आ सके कि इस राष्ट्रविरोधी कृत्य के पीछे कौन-कौन जिम्मेदार थे और मुख्यमंत्री कार्यालय की वास्तविक भूमिका क्या रही।

