
चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण के बाद कांग्रेस बताए तथ्यों के बजाय संवैधानिक संस्थाओं पर अविश्वास क्यों फैला रही : सिसोदिया
हिमाचल में विकास और जनहित के मुद्दों पर जवाब देने के बजाय राष्ट्रीय संस्थाओं पर आरोप लगाना कांग्रेस की राजनीति
हिमाचल प्रदेश की जनता राजनीतिक शोर नहीं, तथ्य और जवाब चाहती है
आपकी खबर, ब्यूरो।
शिमला, 28 सितंबर। जिला परिषद शिमला के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह सिसोदिया ने जश्न रेस्टोरेंट, शिमला में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक भ्रम पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 26 सितंबर को चुनाव आयोग की ओर से जारी स्पष्टीकरण के बाद कांग्रेस को आरोप-प्रत्यारोप के बजाय तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए।
सिसोदिया ने कहा कि हालिया विवाद उन मीडिया रिपोर्टों के बाद सामने आया जिनमें चुनाव आयोग के भीतर कुछ प्रक्रियाओं को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की दर्ज आपत्तियों का उल्लेख किया गया था। चुनाव आयोग ने बाद में स्पष्टीकरण जारी किया, जबकि कांग्रेस ने आयोग के स्पष्टीकरण को अपर्याप्त बताते हुए अपनी आपत्तियां बरकरार रखीं।
उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं से प्रश्न पूछना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल को तथ्यों, आधिकारिक रिकॉर्ड और न्यायिक निर्णयों के आधार पर ही आरोप लगाने चाहिए।
सिसोदिया ने कहा कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) जैसी प्रक्रिया का मूल उद्देश्य मतदाता सूचियों को अद्यतन करना और प्रत्येक पात्र नागरिक का मताधिकार सुनिश्चित करना होना चाहिए। इसलिए किसी भी विवाद में सबसे महत्वपूर्ण कसौटी यही होनी चाहिए कि कोई पात्र मतदाता मतदाता सूची से वंचित न हो और प्रक्रिया कानून के अनुसार पारदर्शी ढंग से चले।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में मतदाता सूची की शुद्धता और प्रत्येक पात्र नागरिक तक निर्वाचन तंत्र की पहुंच विशेष महत्व रखती है। दुर्गम क्षेत्रों, ग्रामीण इलाकों, प्रवासी कामगारों, वरिष्ठ नागरिकों और अन्य पात्र मतदाताओं को चुनावी प्रक्रिया में समान अवसर मिलना चाहिए।
सिसोदिया ने कहा कि कांग्रेस यदि SIR या किसी दूसरी चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाती है तो उसे ठोस तथ्य और कानूनी आधार जनता के सामने रखने चाहिए। केवल राजनीतिक बयानबाजी से लोगों के मन में चुनावी व्यवस्था के प्रति संदेह पैदा करना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि आयोग के आंतरिक प्रशासनिक पत्राचार और नीतिगत निर्णयों के बीच अंतर करना आवश्यक है। हालिया रिपोर्टों और चुनाव आयोग के बाद के स्पष्टीकरण को एक साथ पढ़ा जाना चाहिए, न कि किसी एक हिस्से को राजनीतिक सुविधा के अनुसार प्रस्तुत किया जाना चाहिए। कांग्रेस ने आयोग के स्पष्टीकरण के बाद भी गंभीर आपत्तियां उठाई हैं; इसलिए सार्वजनिक बहस का आधार पूरे रिकॉर्ड और सत्यापित तथ्यों को बनाया जाना चाहिए।
सिसोदिया ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस नेतृत्व ने चुनावी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। जून 2024 में राहुल गांधी ने भारतीय EVM को “ब्लैक बॉक्स” कहा था और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए थे।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को चुनाव सुधारों पर चर्चा करने का पूरा अधिकार है, लेकिन ऐसी चर्चा तथ्य, तकनीकी प्रमाण और संस्थागत प्रक्रिया पर आधारित होनी चाहिए। सिसोदिया ने राहुल गांधी के 2019 के सुप्रीम कोर्ट से जुड़े मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि राजनीतिक बयान देते समय संवैधानिक संस्थाओं के नाम का प्रयोग अत्यंत जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए।
वर्ष 2019 में राहुल गांधी ने राफेल मामले में “चौकीदार चोर है” टिप्पणी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश से गलत तरीके से जोड़ने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में बिना शर्त माफी मांगी थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी माफी स्वीकार करते हुए अवमानना की कार्यवाही बंद कर दी थी और भविष्य में अधिक सावधान रहने को कहा था।
सिसोदिया ने कहा कि इस पुराने प्रकरण से भी यही संदेश मिलता है कि राजनीतिक बहस कितनी भी तीखी क्यों न हो, अदालतों और संवैधानिक संस्थाओं के संबंध में कही जाने वाली बात तथ्यात्मक रूप से सटीक होनी चाहिए।
भूपेंद्र सिंह सिसोदिया ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की जनता के सामने आज रोजगार, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, ग्रामीण विकास और आर्थिक स्थिति से जुड़े अनेक प्रश्न हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार को इन विषयों पर अपना रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हिमाचल की जनता राष्ट्रीय संस्थाओं पर राजनीतिक आरोपों से अधिक यह जानना चाहती है कि प्रदेश में विकास कार्यों की गति क्या है, युवाओं के लिए रोजगार के कितने अवसर पैदा हुए, ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं में कितना सुधार हुआ और पंचायत एवं जिला परिषद स्तर पर विकास के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं या नहीं।
सिसोदिया ने कहा कि जिला परिषद और पंचायती राज संस्थाएं सीधे आम जनता से जुड़ी हुई हैं। प्रदेश सरकार को ग्रामीण विकास, सड़कों, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाओं तथा पंचायतों की वित्तीय आवश्यकताओं पर प्राथमिकता से ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को राजनीतिक आरोपों के साथ-साथ इन स्थानीय और जनहित के सवालों का भी जवाब देना चाहिए।
सिसोदिया ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव आयोग, न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता और जवाबदेही अत्यंत महत्वपूर्ण है। विपक्ष को सवाल उठाने का अधिकार है और सरकार तथा संस्थाओं को जवाब देना चाहिए, लेकिन सार्वजनिक विमर्श में अपुष्ट दावों को स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के हालिया स्पष्टीकरण और उससे पहले सामने आई रिपोर्टों को लेकर यदि कोई प्रश्न शेष हैं तो उनका समाधान आधिकारिक रिकॉर्ड, कानूनी प्रक्रिया और पारदर्शिता के माध्यम से होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की जनता राजनीतिक शोर नहीं, तथ्य और जवाब चाहती है। कांग्रेस प्रदेश की जनता को बताए कि उसके पास हिमाचल के विकास, रोजगार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जनसुविधाओं के लिए क्या ठोस उपलब्धियां और आगे की कार्ययोजना है।
