
रोहंडा स्कूल में प्राकृतिक खेती, मिलेट्स और देशी बीज संरक्षण पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित
शिक्षकों और विद्यार्थियों को प्राकृतिक खेती, मोटे अनाजों के महत्व तथा देशी बीजों के संरक्षण के प्रति किया जागरूक
आपकी खबर, ब्यूरो
मंडी, 22 अक्तूबर। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय रोहंडा में इंटीग्रेटेड मिशन लाइफ प्रोजेक्ट के अंतर्गत एक दिवसीय विद्यालय स्तरीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में जिला मंडी के मिलेट्स फेलो एवं प्राकृतिक खेती के विशेषज्ञ सोम कृष्ण गौतम ने मुख्य प्रवक्ता के रूप में शिरकत की। उन्होंने विद्यालय के समस्त शिक्षक वर्ग, अध्यापिकाओं तथा विद्यार्थियों को प्राकृतिक खेती, मिलेट्स (मोटे अनाज) के महत्व और देशी बीजों के संरक्षण के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी।

कार्यशाला के दौरान सोम कृष्ण गौतम ने बताया कि वर्तमान समय में मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना बेहद आवश्यक है। उन्होंने प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाले विभिन्न जैविक घटकों, जैसे जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, सप्तधान्य अर्क और दशपर्णी अर्क के बारे में जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने अच्छादन तथा प्राकृतिक पौध लेप जैसी विधियों के महत्व और उपयोग के बारे में भी विस्तार से समझाया।
सोम कृष्ण गौतम ने देशी बीजों के संरक्षण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि पारंपरिक बीज हमारी कृषि विरासत हैं। इनका संरक्षण किसानों की आत्मनिर्भरता, मिट्टी की सेहत और पर्यावरण संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि देशी बीजों और पारंपरिक अनाजों को संरक्षित करके हम आने वाली पीढ़ियों के लिए कृषि की समृद्ध विरासत को सुरक्षित रख सकते हैं।
उन्होंने कोदरा, कोणी, चीणा, शांक, ज्वार, बाजरा और रामदाना जैसे पारंपरिक अनाजों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि ये अनाज हमारी पारंपरिक खाद्य संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। बुजुर्गों ने इन अनाजों और बीजों को सहेजकर रखा, लेकिन बदलते समय के साथ इनका उत्पादन और भोजन में उपयोग कम होता गया। ऐसे में इन पारंपरिक अनाजों को दोबारा खेती और अपने दैनिक भोजन का हिस्सा बनाना जरूरी है।
‘भोजन ही औषधि है’ का दिया संदेश
कार्यशाला में सोम कृष्ण गौतम ने ‘भोजन ही औषधि है’ की अवधारणा पर विशेष रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए हमें अपने पारंपरिक खानपान और प्राकृतिक जीवनशैली की ओर लौटना होगा। मोटे अनाजों का उत्पादन और सेवन बढ़ाकर हम अपनी पारंपरिक खाद्य संस्कृति को पुनर्जीवित करने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में भी योगदान दे सकते हैं।
उन्होंने जल, जंगल और जमीन के संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि यदि हम अपने शरीर को स्वस्थ रखने और पर्यावरण को सुरक्षित बनाने के प्रति गंभीर हैं, तो हमें प्रकृति के अनुकूल खेती और जीवनशैली अपनानी होगी। पारंपरिक अनाजों को उगाना और उन्हें भोजन में शामिल करना मिट्टी के संरक्षण, जैव विविधता को बनाए रखने तथा पर्यावरणीय संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने शिक्षकों और विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे प्राकृतिक खेती, देशी बीज संरक्षण और मिलेट्स के महत्व को अपने परिवारों तथा समाज तक पहुंचाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी हमारी पारंपरिक कृषि पद्धतियों और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को समझ सकें।
इस अवसर पर सोम कृष्ण गौतम ने कार्यशाला में आमंत्रित करने के लिए विद्यालय के प्रधानाचार्य खूब राम, कार्यवाहक प्रधानाचार्य लेखराज शर्मा तथा कृषि प्रवक्ता डॉ. ललित सोनी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विद्यालय के समस्त शिक्षक एवं शिक्षिका वर्ग का भी धन्यवाद किया।
उन्होंने विशेष रूप से टीजीटी साइंस पवन कुमार का आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने विद्यालय में उन्हें भरपूर मान-सम्मान दिया। सोम कृष्ण गौतम ने कहा कि राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय रोहांडा में उन्हें जो स्नेह और सम्मान मिला, उसके लिए वह विद्यालय परिवार के सदैव आभारी रहेंगे।
कार्यशाला के माध्यम से प्राकृतिक खेती, पारंपरिक अनाजों के महत्व, देशी बीजों के संरक्षण तथा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश दिया गया। यह आयोजन विद्यार्थियों और शिक्षकों को प्रकृति के अनुकूल जीवनशैली अपनाने तथा अपनी पारंपरिक कृषि विरासत को संरक्षित करने के लिए प्रेरित करने की दिशा में महत्वपूर्ण रहा।
