
पराली प्रबंधन को लेकर केंद्र सरकार गंभीर, किसानों की आय बढ़ाने और मिट्टी की सेहत सुधारने पर जोर
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों के कृषि मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ की चर्चा
पराली जलाने की घटनाओं में कमी लाने के लिए मशीनों की उपलब्धता और जागरूकता पर विशेष ध्यान
आपकी खबर, ब्यूरो।
नई दिल्ली, 13 अक्तूबर। पराली जलाने की समस्या पर अंकुश लगाने और किसानों को इसके बेहतर प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मंगलवार को कृषि भवन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ राज्यों के कृषि मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों से सार्थक चर्चा की। बैठक में पराली प्रबंधन को प्रभावी बनाने, किसानों को वैकल्पिक उपायों के प्रति जागरूक करने तथा कृषि अवशेषों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि किसान भाई पराली जलाने के बजाय उसका उचित प्रबंधन करें और उसे उपयोगी संसाधन के रूप में इस्तेमाल करें। इससे न केवल किसानों की आमदनी बढ़ाने के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
बैठक में पराली प्रबंधन के लिए आवश्यक कृषि मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और उनके प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके साथ ही किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान तथा पराली के वैकल्पिक उपयोगों के बारे में जागरूक करने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।
केंद्र सरकार का मानना है कि पराली प्रबंधन के लिए राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, आधुनिक कृषि उपकरणों का उपयोग और किसानों की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है। इन प्रयासों से कृषि अवशेषों का उचित निस्तारण संभव होगा और पराली जलाने की घटनाओं में कमी लाने में मदद मिलेगी।
केंद्रीय मंत्री ने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य सरकारों के साझा प्रयासों से पराली जलाने की घटनाओं को और कम किया जा सकेगा। पराली का उचित उपयोग किसानों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी साबित हो सकता है। साथ ही इससे मिट्टी की सेहत सुरक्षित रखने और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में भी सहायता मिलेगी।
सरकार का लक्ष्य किसानों को ऐसे व्यावहारिक विकल्प उपलब्ध कराना है, जिनसे खेती की लागत और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को कम किया जा सके। पराली प्रबंधन को जनभागीदारी से जोड़कर कृषि और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
