
जनता को अपमानित करने के बजाय चार साल के कामकाज का हिसाब दें विक्रमादित्य सिंह : रवि मेहता
सुन्नी-लूहरी सड़क बहाली के लिए धरना देने वालों पर कथित टिप्पणी को बताया दुर्भाग्यपूर्ण
शिमला ग्रामीण में विकास कार्यों और 10 गारंटियों पर मांगा जवाब
आपकी खबर, ब्यूरो।
शिमला, 21 अक्तूबर। शिमला ग्रामीण से भाजपा प्रत्याशी रहे रवि मेहता ने लोक निर्माण मंत्री एवं शिमला ग्रामीण के विधायक विक्रमादित्य सिंह पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें जनता को अपमानित करने के बजाय अपने चार साल के कार्यकाल का हिसाब देना चाहिए। उन्होंने सुन्नी दशहरा मेले के दौरान सुन्नी-लूहरी सड़क बहाली के लिए आठ दिन तक क्रमिक धरना देने वाले जनप्रतिनिधियों और आम जनता के लिए कथित तौर पर ‘मकड़ झंडू’ जैसे शब्दों का प्रयोग किए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
रवि मेहता ने कहा कि सुन्नी-लूहरी सड़क करीब चार महीने तक बंद रहने के बाद जनता के संघर्ष के चलते बहाल हुई। ऐसे में सड़क की समस्या को लेकर आवाज उठाने वाले लोगों का अपमान करने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान करना जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जनता को अपमानजनक संबोधन नहीं, बल्कि अपनी समस्याओं का जवाब और समाधान चाहिए।
मेहता ने कहा कि विक्रमादित्य सिंह शिमला ग्रामीण में भाजपा की जमानत जब्त करवाने की बात करते हैं, जबकि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 21,409 मत मिले थे। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दावे करने से पहले विधायक को जनता के जनादेश और अपने कार्यकाल में हुए विकास कार्यों पर बात करनी चाहिए।
रवि मेहता ने शिमला ग्रामीण में रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि पिछले चार वर्षों में क्षेत्र के युवाओं को प्रतिवर्ष पांच हजार रोजगार देने के मामले में विधायक और उनकी सरकार का क्या हिसाब है। उन्होंने क्षेत्र में बंद हुए स्कूलों की संख्या, पुराने स्कूलों के कमरों की मरम्मत तथा शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए उठाए गए कदमों का भी ब्योरा मांगा।
उन्होंने कहा कि स्कूलों की मरम्मत के लिए कथित तौर पर 600 करोड़ रुपये की राशि में से कितनी धनराशि कहां खर्च की गई, इसका स्पष्ट विवरण जनता के सामने रखा जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्र के अस्पतालों में डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य कर्मचारियों के रिक्त पदों को भरने की समयसीमा बताने की मांग की।
मेहता ने सड़क, बिजली, पेयजल और सिंचाई से जुड़ी समस्याओं को उठाते हुए कहा कि क्षेत्र की जनता लंबे समय से इन मूलभूत सुविधाओं में सुधार की अपेक्षा कर रही है। उन्होंने विधायक से पूछा कि इन समस्याओं के समाधान के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि यदि विक्रमादित्य सिंह चार वर्षों में 600 करोड़ रुपये खर्च करने का दावा कर रहे हैं, तो उन्हें स्पष्ट करना चाहिए कि यह धनराशि किन-किन योजनाओं पर, कहां और कितनी खर्च की गई। जनता के सामने प्रत्येक मद का विवरण रखा जाना चाहिए, ताकि विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
रवि मेहता ने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने जनता से 10 गारंटियों के माध्यम से कई वादे किए थे। अब उन वादों की प्रगति का हिसाब देना सरकार और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि केवल आंकड़ों और घोषणाओं से जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता, बल्कि इसके लिए धरातल पर काम करके दिखाना होगा।
मेहता ने कहा कि शिमला ग्रामीण की जनता आने वाले चुनाव में विधायक के कार्यकाल का मूल्यांकन करेगी और लोकतांत्रिक तरीके से अपना फैसला सुनाएगी। उन्होंने दोहराया कि जनता को अपमानजनक टिप्पणियां नहीं, बल्कि रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े सवालों के स्पष्ट जवाब चाहिए।
