एचपीयू में 25% फीस वृद्धि के खिलाफ एसएफआई का मोर्चा, फैसला वापस न लेने पर राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी
हिमाचल विश्वविद्यालय में फीस बढ़ोतरी पर भड़की एसएफआई, कुलपति घेराव और कक्षाओं के बहिष्कार का ऐलान
एचपीयू की फीस वृद्धि को छात्र विरोधी करार, एसएफआई ने सरकार और प्रशासन को दी आंदोलन की चेतावनी
आपकी खबर, ब्यूरो।
शिमला, 3 अगस्त। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) में सामान्य फीस, परीक्षा शुल्क, हॉस्टल शुल्क तथा विभिन्न प्रशासनिक शुल्कों में 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी के फैसले का स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने कड़ा विरोध किया है। संगठन ने इसे छात्र विरोधी और जनविरोधी निर्णय बताते हुए चेतावनी दी है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह फैसला तत्काल वापस नहीं लिया तो पूरे प्रदेश में चरणबद्ध और उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।
एसएफआई की हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय कैंपस कमेटी ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि विश्वविद्यालय की स्थापना प्रदेश के दूरदराज, ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों को सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी, लेकिन फीस में की गई भारी बढ़ोतरी इस मूल उद्देश्य के विपरीत है। संगठन का आरोप है कि प्रशासन शिक्षा को आम विद्यार्थियों की पहुंच से दूर कर केवल संपन्न वर्ग तक सीमित करने की दिशा में काम कर रहा है।
एसएफआई ने बताया कि संगठन पहले भी विश्वविद्यालय प्रशासन को वित्तीय संसाधनों के वैकल्पिक उपायों से संबंधित ज्ञापन सौंप चुका है। इसके बावजूद प्रशासन ने स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों, एलएलबी, एमबीए, एमटेक सहित विभिन्न कोर्सों की फीस, थीसिस विस्तार शुल्क, प्रोजेक्ट मूल्यांकन, पुनर्मूल्यांकन शुल्क, डिग्री जारी करने, माइग्रेशन सर्टिफिकेट, लेट फीस और हॉस्टल से जुड़े विभिन्न शुल्कों में 25 प्रतिशत तक की वृद्धि कर दी है।
संगठन का कहना है कि राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन अपनी वित्तीय कमजोरियों का बोझ विद्यार्थियों पर डाल रहे हैं। एसएफआई के अनुसार महंगाई के दौर में यह फैसला किसानों, मजदूरों और मध्यमवर्गीय परिवारों के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करना और अधिक कठिन बना देगा तथा इससे ड्रॉपआउट की समस्या भी बढ़ सकती है।
एसएफआई ने मांग की है कि सभी शैक्षणिक, परीक्षा, हॉस्टल और प्रशासनिक शुल्कों में की गई 25 प्रतिशत वृद्धि को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। साथ ही पुनर्मूल्यांकन, थीसिस सबमिशन और डिग्री शुल्क में बढ़ोतरी को भी निरस्त किया जाए। संगठन ने राज्य सरकार से विश्वविद्यालय के वित्तीय संकट के समाधान के लिए विशेष वित्तीय पैकेज जारी करने और बजटीय प्रबंधन पर श्वेत पत्र जारी करने की भी मांग की है।
संगठन ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन ने फीस वृद्धि का फैसला वापस नहीं लिया तो विश्वविद्यालय परिसर में व्यापक हस्ताक्षर अभियान, कुलपति एवं कुलसचिव का घेराव, पुतला दहन, क्रमिक भूख हड़ताल और कक्षाओं के बहिष्कार जैसे आंदोलन किए जाएंगे। इसके अलावा प्रदेश के सभी डिग्री कॉलेजों और संबद्ध संस्थानों को साथ लेकर राज्यव्यापी “हिमाचल विश्वविद्यालय बंद” का आह्वान भी किया जाएगा।
