पेंशनरों की राज्यपाल से गुहार: बकाया भुगतान, वित्तीय संकट और संवैधानिक हस्तक्षेप की मांग
शिमला में राज्यपाल से मिला प्रतिनिधिमंडल, मांगों से करवाया अवगत
आपकी खबर, शिमला।
25 फरवरी। हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से लोक भवन, शिमला में मुलाकात कर पेंशनरों की लंबित देनदारियों, वित्तीय संकट और संवैधानिक हस्तक्षेप की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। इसके उपरांत शिमला में पत्रकार वार्ता को भी संबोधित किया।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व समिति के अतिरिक्त महासचिव भूपराम वर्मा ने किया। उन्होंने राज्य में वित्तीय अस्थिरता, पेंशन अधिकारों के उल्लंघन और प्रशासनिक तंत्र में कथित विघटन का हवाला देते हुए भारत के संविधान के अनुच्छेद 360 (वित्तीय आपातकाल) और अनुच्छेद 356 के तहत हस्तक्षेप की मांग का संवैधानिक प्रतिवेदन राज्यपाल को सौंपा।
संघर्ष समिति ने ज्ञापन में बताया कि प्रदेश के 18 विभागों, बोर्डों, निगमों और विभिन्न संगठनों से जुड़े हजारों पेंशनभोगी और पारिवारिक पेंशनभोगी लंबे समय से अपनी जायज मांगों को लेकर सरकार से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन अब तक ठोस समाधान नहीं मिला है।
समिति का कहना है कि 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 तक वेतन संशोधन एरियर लंबित, महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) का भुगतान लंबित, ग्रेच्युटी, कम्यूटेशन और लीव एनकैशमेंट के मामले तीन साल से लंबित, चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लाखों रुपये के दावे अटके, 13% डीए की किस्त अभी तक देय आदि मांगें शामिल हैं।
समिति के अनुसार गंभीर बीमारियों से पीड़ित कई पेंशनरों को अपनी जेब से इलाज कराना पड़ रहा है और कई मामलों में लाखों रुपये की प्रतिपूर्ति लंबित है। इस दौरान 500 से अधिक पेंशनर अपनी मांगों का इंतजार करते-करते दुनिया से विदा हो चुके हैं।
भूपराम वर्मा ने आरोप लगाया कि पेंशनरों ने 16 सितंबर 2025 को 14 सूत्रीय मांग पत्र सरकार को सौंपा था, जिसके बाद कई बार स्मरण पत्र भी भेजे गए, लेकिन केवल आश्वासन ही मिले।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा सत्र के दौरान 28 नवंबर 2025 को 10 दिन के भीतर बैठक बुलाने का आश्वासन दिया था, जो अब तक पूरा नहीं हुआ।
समिति का आरोप है कि सरकार एक ओर पेंशनरों के भुगतान में देरी कर रही है, वहीं दूसरी ओर मंत्रियों और विधायकों के वेतन-भत्तों में वृद्धि, बोर्ड-निगमों में राजनीतिक नियुक्तियां और अन्य खर्च जारी हैं।
समिति ने राज्य के वित्त सचिव द्वारा 8 फरवरी 2026 को कैबिनेट के सामने रखी गई प्रस्तुति का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने स्वयं राज्य की गंभीर वित्तीय स्थिति स्वीकार की है।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब सरकार छठे वेतन आयोग की देनदारियां ही पूरी नहीं कर पा रही है, तो आठवें वेतन आयोग का भार कैसे उठाएगी।
संघर्ष समिति ने राज्यपाल से मांग की है कि राज्य सरकार से विस्तृत वित्तीय स्थिति रिपोर्ट मंगवाई जाए, राष्ट्रपति को राज्य की वित्तीय अस्थिरता का प्रतिवेदन भेजा जाए, आवश्यकता पड़ने पर अनुच्छेद 360 के तहत वित्तीय आपातकाल की सिफारिश की जाए, यदि शासन संवैधानिक रूप से संचालित नहीं हो रहा, तो अनुच्छेद 356 के तहत कदम उठाए जाएं, पेंशनरों की लंबित देनदारियों का तत्काल भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि यह प्रतिवेदन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं बल्कि वरिष्ठ नागरिकों की गरिमा, संवैधानिक नैतिकता और वित्तीय जवाबदेही की रक्षा के लिए सौंपा गया है।
इस प्रतिनिधिमंडल में बृजलाल ठाकुर अध्यक्ष, परिवहन सेवानिवृत्त कर्मचारी कल्याण संघ, देवीलाल ठाकुर कॉरपोरेट सेक्टर, मदन लाल शर्मा सचिवालय कल्याण संघ और गंगाराम शर्मा वरिष्ठ उपाध्यक्ष, पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन मौजूद रहे।
संघर्ष समिति के अतिरिक्त महासचिव भूपराम वर्मा ने कहा कि यदि पेंशनरों की मांगों का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो प्रदेशभर में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

